लीड्स बिज़नेस स्कूल इंग्लॅण्ड से पढाई कर के शुरू करी भोपाल में जैविक खेती

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सुधांशु भोपाल के पास विदिशा में 14 एकर में जैविक कृषि (साथ साथ गौ आधारित कृषि) कर रहे हैं और अपने प्रोडक्ट्स को भोपाल में जैविक जीवन ब्रांड स्टोर (Jaivik Jeevan) के अंतर्गत मार्किट में बेच रहे हैं| इस वृतांत में मुख्य बात यह है कि सुधांशु किसान परिवार से नहीं हैं और न ही वे खेती के बारे में कुछ जानते थे जब उन्होंने शुरुआत की| दुसरी प्रमुख बात यह है कि सुधांशु लीड्स बिज़नेस स्कूल इंग्लॅण्ड, जो कि दुनिया की काफी जाना माना यूनिवर्सिटी है, से पढाई कर के किसी कॉर्पोरेट नौकरी में ना जमते हुए जैविक कृषि को बढ़ावा देने आगे आये|

कोई अपनी गाडी में सेकंड ग्रेड प्रोडक्ट नहीं डालता लेकिन जब बात शरीर की हो तो लोग नहीं सोचते क्या खा रहे हैं| रसायन खेती से लोगो तक जहर पहुंचता है|

मध्यप्रदेश में जैविक यात्रा के दौरान OIS (Organic India Story) टीम की मुलाकात हुई सुधांशु से जहाँ काफी सारे जैविक कृषि से जुड़े विषयो पर खुल के वार्तालाप हुआ|

आज कल जैविक के क्षेत्र में काफी सारे गुरु आगये हैं जिनमे से कुछ सही भी हैं परन्तु बहुत सारे लोगों ने इसे बिज़नेस मॉडल की तरह ले लिया है|

सुधांशु बताते हैं क्यूंकि उनका सम्बन्ध किसान परिवार से नहीं रहा है और उन्हें खेती के कोई गुण भी नहीं आते थे तो उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा ये ज्ञान सीखने के लिए| ऐसे में वे बहुत सारे गुरुओं के पास गए और उनसे सीखने की कोशिश की|

इतना घूम के ये समझा की अधिकांशतः गुरु जो इसे बिज़नेस की तरह चलाते हैं वे लोगों सही बातें नहीं बताएँगे क्यूंकि उन्हें लगता है कि उससे उनका बिज़नेस रुकता है| वे कहते हैं कि फसल को कुछ नहीं होगा उनका जैविक प्रोडक्ट इस्तेमाल करो या इतना लगाओगे तो इतने की फसल बिकेगी इत्यादि

परन्तु असली चीज़े तभी समझ में आती हैं जब आप जमीन पर खड़े होते हो और समझते हो कि ये (खेती) कोई एक्सेल शीट नहीं है जहाँ सिंपल कैलकुलेशन हो|

शुरुआती संघर्ष

जैसा कि ऊपर विदित हुआ कि सुधांशु खेती के बैकग्राउंड से नहीं है तो सबसे पहला संघर्ष तो इस ज्ञान को सीखने में हुआ| जैविक कृषि सीखने के लिए सुधांशु काफी सारे शिविरों में गए|

काफी गुरुओं से मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने फार्म में अलोएवेरा बोया जो उन्होंने किसी कैंप से ही खरीदा था| सुधांशु बताते हैं कि अलोएवेरा का ट्रांसपोर्टेशन ठीक से ना हो पाने से वो खराब हो सकता है, और ऐसा ही उनके साथ भी हुआ| जब तक अलोएवेरा उनके फार्म पर आया तब तक सड़ना चालु हो गया था| परन्तु अच्छी जगह से खरीदने की वजह से वे धीरे धीरे करके उस अलोएवेरा को वापस भेज पाए जिसमे काफी समय लगा|

परन्तु मार्किट में ऐसे बहुत से लोग हैं जो किसान को गलत सलाह देते हैं कि आप ये ऊगा लो या वो ऊगा लो, उनका काम केवल अपने पौधे या प्रोडक्ट्स बेचना है और फिर उसके बाद वो नज़र नहीं आते|

फिर सुधांशु ने एक अच्छी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी ट्राई किया| कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में लोग किसान से कॉन्ट्रैक्ट कर लेते हैं कि उपजाने में जो भी सामान लगेगा वो किसान उसी व्यक्ति से खरीदेगा और उसके बाद जो भी फसल आएगी वो पूरी फसल वह व्यक्ति किसान से एक निर्धारित मूल्य पर खरीद लेता है| सुधांशु के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में बहुत से गलत व्यक्ति भी आ गए हैं जो क्षणिक लाभ के लिए किसान को ठग लेते हैं| किसान को किसी पर भी आँख मूँद कर विशवास नहीं करना चाहिए| कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से पहले उस व्यक्ति या कंपनी का बैकग्राउंड चेक करना बहुत जरुरी होता है|

अधिकांशतः जो लोग कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करवाते हैं उनमे से बहुत सारे यह नहीं चाहते कि फसल हो वार्ना उन्हें वो फसल खरीदनी पड़ेगी किसान से|

फिर धीरे धीरे पैडी से सुधांशु को जैविक खेती के बारे में काफी समझ में आया क्यूंकि इसके लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी, इस बार नुक्सान उठाने की कोई गुंजाईश नहीं थी और ये फसल कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर भी नहीं थी| परन्तु यहाँ भी संघर्ष और बढ़ गया जब फसल पक के त्यार हो गयी और सुधांशु को मार्किट लिंकेज नहीं मिला|

मार्किट कैसे बनाया

पैडी की फसल पकने और मार्किट से न जुड़ने के बाद सुधांशु ने मार्किट बनाने पे काम शुरू किया| शुरुआत में सुधांशु ने अपने दोस्त और रिश्तेदारों के नेटवर्क में अपने खेती के तरीके और फसल को प्रमोट करना शुरू किया जिससे उनकी फुटकर बिक्री होने लगी यानी 1 किलो या 2 किलो डिमांड आने लगी|

किसान के लिए जितना जरूरी है अच्छे तरीके से अच्छी फसल उगाना उतना ही जरुरी है अपनी फसल का मार्किट बनाना

इस फुटकर बिक्री से सुधांशु रिटेलिंग के बिज़नेस के गुण सीखने लगे और धीरे धीरे प्रोसेसिंग, डिजाइनिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग पर भी ध्यान देने लगे| फार्मर्स मार्किट से काफी लाभ हुआ जहाँ काफी अच्छा नेटवर्क बनने लगा| ऐसे फिर उन्होंने जैविक जीवन नाम से रिटेल स्टोर की शुरुआत की जिसके माध्यम से भोपाल में ही लोगो तक जैविक अन्न पहुंचा रहे हैं|

आज के समय में सुधांशु अपने खेत के कुछ हिस्से में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर रहें हैं और बाकी बचे हिस्से में सब्जी, दाल व् अन्य सामग्री ऊगा रहे हैं जिन्हे वो सीधा उपभोक्ता (ग्राहक) को बेच रहे हैं| सुधांशु के इस मिले जुले मॉडल से उन्हें है और साथ लोगो तक भी लाभकारी अन्न पहुंचा पा रहे हैं| कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए उगाया हुआ अनाज सुधांशु कॉन्ट्रैक्ट वाली कंपनी बेच देते हैं| और बाकी जगह में उग रहे जैविक सब्जी और दालों को वे जैविक जीवन स्टोर से कम एवं उचित मूल्यों में लोगो तक पहुंचा रहे हैं|

यहाँ एक किसान ही दुकानदार बना और लोगों तक जैविक अन्न पहुँचाया

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One thought on “लीड्स बिज़नेस स्कूल इंग्लॅण्ड से पढाई कर के शुरू करी भोपाल में जैविक खेती

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    Thanks for the coverage TVS. You guys are doing good work by bringing honest ground-level experiences of the farming community. All the best.

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